महफूज़ अली/केशकाल–(बस्तर के प्रसिद्ध साहित्यकार की कलम से)

केशकाल। फरसगांव से 8 किमी दूर पंचायत झांटीबन में स्थित प्रसिद्ध लिंगेश्वरी माता की गुफा का द्वार बुधवार को श्रद्धालुओं के लिए सुबह 5 बजे पुजारियों की उपस्थिति में खोला गया। इस वर्ष यहां पर बिल्ली के पंजे के निशान पाए गए। इसके आधार पर पुजारियों ने कहा कि यह वर्ष भय के माहौल से परिपूर्ण होगा। बिल्ली के पंजे के निशान दक्षिण से उत्तर की ओर चलते हुए दिखाई दिए हैं। कई पीढ़ियों से चली आ रही इस विशेष परंपरा और लोकमान्यता के कारण भाद्रपद माह में एक दिन शिवलिंग की पूजा होती है। लिंगेश्वरी माता का द्वार साल में एक बार ही खुलता है। यहां बड़ी संख्या में निसंतान दंपती संतान की कामना लेकर आते हैं, और उनकी मन्नत पूरी होती है।
बाहर से अन्य पत्थर की तरह सामान्य दिखने वाला यह पत्थर अंदर से स्तूपनुमा है। इस पत्थर की संरचना को भीतर से देखने पर ऐसा लगता है.. मानो किसी विशाल पत्थर को कटोरी नुमा तराशकर चट्टान के
ऊपर उलट दिया गया हो। ..इस मंदिर की दक्षिण दिशा में छोटी सी सुरंग है, जो इस गुफा का प्रवेश द्वार है।.. प्रवेश द्वार पर अंकित पदचिन्ह से भविष्य में घटने वाली घटनाओं का अनुमान लगाते हैं ,यह प्राकृतिक शिवालय पूरे आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। .लोगों का कहना है, कि पूजा के बाद मंदिर की सतह चट्टान पर रेत बिछाकर उसे बंद किया जाता है। अगले साल रेत पर फिर पद चिह्न मिलेगे ।
पर निशान देखकर भविष्य की घटनाओं का अनुमान लगाया जाता है।.. यहां सुबह से ही ग्राम समिति व पुलिस तैनात रही। जिनकी मनोकामना पूर्ण होती है.. और संतान की प्राप्ति हुई ऐसे कई श्रद्धालु यहां पर दर्शन करने पहुंचे थे। ..उत्तर प्रदेश, कोंडागांव, रायपुर, ओडिशा, मध्यप्रदेश के कई दंपती यहां पर मन्नत पूरी होने के बाद दर्शन करने आए थे। ..यहां रवि घोष पूर्व जिला पंचायत सदस्य व उनके मित्रों ने खिचड़ी वितरण किया। कांकेर सांसद भोजराज नाग भी अपनी माता जी के उपस्थित रहे। जनप्रतिनिधियों के अलावा कई अधिकारी मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचे। दर्शन जारी हैं। समिति का कहना है कि जब तक सभी को दर्शन नहीं हो जाते तब तक मंदिर खुला रहेगा। गुफा के अंदर बैठकर या लेटकर ही जा सकते हैं..प्रवेश द्वार इतना छोटा है कि बैठकर या लेटकर ही यहां प्रवेश किया जाता था। अंदर इतनी जगह है कि लगभग 25 से 30 आदमी आराम से बैठ सकते हैं। गुफा के अंदर चट्टान के बीचों-बीच प्राकृतिक शिवलिंग है, जिसकी लंबाई ढाई फीट से तीन फीट है।.. प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है.. कि पहले इसकी ऊंचाई बहुत कम थी, बस्तर का यह शिवलिंग गुफा गुप्त है।.. वर्षभर में दरवाजा एक दिन ही खुलता है।.. बाकी दिन ढंका रहता है। इसे शिव और शक्ति का समन्वित नाम दिया गया है.. लिंगाई माता। दिनभर श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। इस वर्ष– तीन वर्ष सुजीत कुमार गुप्ता के सुपुत्र सौर्य गुप्ता का जन्म हुआ । बीजापुर के दम्पति विगत तीन वर्षो से आ रहे है। पहली बार राजस्थान से रघुवीर हितेंद्र आए। इस वर्ष आयोजन समिति के प्रमुख रवि घोष ने भक्तो के लगने वाली सीढी के उपर शेड लगा दिया गया है अब पानी बरसात ,धूप के अवसर पर दर्शानार्थीयो को कोई परेशानी नही होगी। इस वर्ष लगभग 25 से 30 हजार तक भीड इकठ्ठी हुई,जहा गत वर्ष के मन्नत वाले अधिकांश लोग उपस्थित हुए। इस अवसर पर नीलकंठ टेकाम जी विधायक केशकाल एव पूर्व विधायक सेवक राम नेताम जी पर परिवार सहित उपस्थित रहे, पुरातत्व सचिव लोकेश गायकवाड ने बताया कि सारी व्यय वस्थाओ के बीच जिस गुफा के नीचे माता जी विराजित है उसके उपर ढके कटोरी नुमा पत्थर को जो समीप का पत्थर उस कटोरी नुमा पत्थर पर टिक गया है और उस पत्थर को धक्का दे रहा है अतः उसे केर्न के माध्यम से हटाया जाए जिससे दर्शन के बाद निकलने वाले रास्ते को चौड़ा किया जा सकता है.. इस प्रकार कुछ सुविधा की और आवश्यकता है।

