
केशकाल/महफूज़ अली–केशकाल के सुप्रसिद्ध घाट के 10 मोड़ों में कांक्रीटीकरण का कार्य अलग-अलग स्तर पर शुरू कर दिया गया है। केशकाल घाट के छह मोड़ों पर कंक्रीट का कार्य किया जाएगा, वहीं चार मोड़ों पर डामरीकरण किया जाएगा, ठेकेदार ने काम तो शुरू कर दिया है लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर अब सवाल उठने लगे हैं ?बस्तर के गोंडवाना सामाजिक कार्यकर्ता अग्रहित कुमेटी ने जब केशकाल घाट के निर्माण कार्य को देखा तो उन्होंने उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए केशकाल की तरफ दूसरे एवं तीसरे मोड पर कंक्रीट का कार्य शुरू किया गया है, जिसमें सीमेंट कम और रेत ज्यादा दिख रही है उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों से गुणवत्ता के बारे में पूछने को कहा, हमारी टीम केशकाल घाट पहुंचकर नेशनल हाईवे विभाग के इंजीनियर राकेश नेताम से बात की उन्होंने कहा कि अभी कंक्रीट के लिए बेस 20mm काम शुरू किया गया है ।एक क्यूबिक मीटर में डेढ़ सौ किलो सीमेंट डाला जाना है एक अनुपात तीन अनुपात 6 के रेश्यो से गिट्टी रेती एवं सीमेंट डाला जाना है। लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता कुमेटी जी का कहना है कि अपनी आंखों से देखने पर वहां सीमेंट की मात्रा कम दिखती है, रेती ज्यादा नजर आ रही है। इसे चेक करने की आवश्यकता है।
पिछले कई वर्षों से केशकाल घाट आम जनता के लिए सरदर्द बन चुका है लोगों को अपेक्षा है कि इस बार केशकाल घाट मरम्मत का कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ किया जाए कोंडागांव कलेक्टर कुणाल दुदावत ने भी घाटी का निरीक्षण कर ठेकेदार को गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य करने का निर्देश दिए है। लेकिन फिलहाल बेस में जो रेती गिट्टी एवं सीमेंट की मात्रा डाली जा रही है लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि कहीं इसमें सीमेंट की मात्रा कम तो नहीं है? लोगों के मन में केशकाल घाट को लेकर डर समा गया है क्योंकि आए दिन केशकाल घाट में जाम लगना या केशकाल घाट को बंद कर देना लोगों के लिए परेशानियों का सबब बन गया चुका है। लोग चाहते हैं परमानेंट सॉल्यूशन निकले और उच्च गुणवत्ता के साथ केशकाल घाट का निर्माण किया जाए।
निर्माण कार्य के दौरान नेशनल हाईवे विभाग के इंजीनियर राकेश नेताम उपस्थित थे और उन्होंने कहा कि फिलहाल निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ किया जा रहा है । लेकिन पूर्व में भी विभाग ने गुणवत्ता के साथ रिपेयरिंग और मरम्मत का कार्य किया था जो कुछ ही दिनों में पानी में बह गया अब इस बार उच्च गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य होने की अपेक्षा लोगों की है।




