
दंतेवाड़ा को अबूझमाड़ से जोड़ने वाले इंद्रावती नदी के बड़े करका घाट में बनकर तैयार हुआ और एक पुल।
इंद्रावती नदी के करका घाट में दंतेवाड़ा से अबूझमाड़ को जोड़ने वाला उम्मीदों का दूसरा पुल तैयार हो गया हैं। बता दें कि इससे पहले 2022 को इंद्रावती नदी के पाहुरनार घाट में एक पुल बनाकर तैयार किया गया था जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया था।
इंद्रावती नदी के करका घाट में दंतेवाड़ा और अबूझमाड़ को जोड़ने वाला पुल बनने से ग्रामीणों को आने जाने में सहुलियत मिल रहा है।
आपको बता दे की 2018/19 के पूर्व दंतेवाड़ा ज़िला से नारायणपुर के अबूझमाड़ के शरहदी गांवों को जोड़ने वाले इंद्रावती नदी के पहुरनार और करका घाट में कोई पुल नहीं था. जिससे ग्रामीणों को ज़िला मुख्यालय आने जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
नदी पार के ग्रामीणों की मांग पर जनवरी 2020 में करका घाट में पुल बनाने की नीव रखी गई थी। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण यहां सुरक्षा बलों के दो कैंप स्थापित किए गए है। तब जाकर इस पुल को बनाया जा सका। इंद्रावती के करका घाट में पुल बनने से अब नदी उस पार के गांव बड़े करका , कोशलनार, तुमरीगुंडा , पदमेटा, चेरपाल, समेत अन्य एक दर्जन से भी अधिक गांवों के लगभग दस हजार ग्रामीणों को दंतेवाड़ा ज़िला मुख्यालय आने जाने में सुविधा मिलेगी। करका घाट में जब पुल नहीं था तो दंतेवाड़ा के लगभग एक दर्जन गांव और बीजापुर राजस्व के और नारायणपुर राजस्व ज़िले के अंधिकांस गांव जो दंतेवाड़ा ज़िले के शरहद में बसे हुए है वहां के ग्रामीण डोंगी (लकड़ी के नाव) से दंतेवाड़ा ज़िले के मुचनार घाट, पहुरनार घाट, और करका घाट को पार कर दंतेवाड़ा ज़िले के बारसूर और चिन्दनार होते हुए दंतेवाड़ा पहुंचते थे। नाव से नदी पार करते वक्त नाव पलट जाने से कई आदिवासी ग्रामीणों की जान जा चुकी है। साथ ही बरसात के मौसम में नदी में बाड़ आ जाने से ग्रामीणों को पूरे बरसात भर कई बड़ी दिक्कतो का सामना करना पड़ता था। इस कारण इंद्रावती नदी पार के ग्रामीणों ने दंतेवाड़ा कलेक्टर से पहुरनार घाट और करका घाट में पुल बनाने की मांग की थी। जिसमें पुल की मांग करने वाले पहुरनार के सरपंच की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी इस घटना के बाद पुल की मांग को लेकर कोई भी ग्रामीण ज़िला प्रशासन और मीडिया के सामने आगे नहीं आया मामले की गंभीरता और ग्रामीणों की समस्याओं को देखकर ज़िला प्रशासन और सरकार ने पुल की सुरक्षा के लिए पुलिस कैंप स्थापित कर पुल बनाने का जिम्मा उठाया और दो साल के अंदर पुल को तैयार किया गया।
अब पुल बनकर तैयार हो गया है तो ग्रामीण डोंगी को छोड़कर पुल से नदी पार करेंगे। तीन जिलों के ग्रामीणों को इस पुल से होगा फायदा ।आपको बता दे की लगभग 40 करोड़ की लागत से करका घाट में पुल बनकर तैयार हुआ है जिसका लोकार्पण इस माह में किया जा सकता है।

