
केशकाल/महफूज़ अली/23मार्च2026–केशकाल में स्थित ईको पर्यटन केंद्र टाटा मारी इन दिनों बस्तर से बाहर निकल कर छत्तीसगढ़ प्रदेश एवं पूरे भारतवर्ष में अपनी अनुपम छटा एवं खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध होता जा रहा है। टाटा मारी इको पर्यटन केंद्र को निहारने प्रदेश के अलावा पूरे देश से लोग आते हैं अक्सर टाटामारी ईको पर्यटन केंद्र में कई विदेशी पर्यटक भी बस्तर की इस शानदार छटा बिखेरते नजारे को निहारते देखे जाते हैं। वन मंडल अधिकारी केशकाल ने ईको पर्यटन केंद्र केशकाल टाटामारी को सुंदर बनाने की दृष्टि से अनेकों कार्य करवाए जिस पर करोड़ों करोड़ों रुपए लगाए गए कुछ कार्य तो सफल रहे लेकिन टाटामारी प्रवेश द्वार से लगे हुए स्टाफ डैम जिस पर लाखों रुपए खर्च किए गए, में सिर्फ बारिश के दिनों में पंद्रह बीस दिन पानी रुक पाता है, बाकी दिनों में यह पानी स्टाफ डैम के नीचे से रिश्ता हुआ बह जाता है। बिना कोई तकनीकी सहायता लिए,बिना ठोस प्लानिंग के इस स्टाफ डैम का निर्माण कर दिया गया लेकिन पानी लीकेज की समस्या का कोई समाधान विभाग नहीं निकाल पाई। इसका जिम्मेदार कौन क्या इसके लिए किसी को जिम्मेदार ठहराया गया।क्या दोषियों पर कुछ कार्यवाही की गई।
कोंडागांव जिले में पूर्व में रहे एक कलेक्टर भ्रष्टाचार के खिलाफ इतने सख्त थे कि सरकारी भवन का निरक्षण के दौरान दीवार पर आये क्रेक दिखने या क्रैक की शिकायत पर भी इंजीनियर के ऊपर कार्यवाही करते थे।इतनी बड़ी चूक का जिम्मेदार कौन। क्या टाटा मारी का स्टॉप डैम बिना इंजिनियर के बना दिया गया कई सवाल लोगों के मन में है।

कुछ वर्षों पूर्व टाटा मारी के मैदानी इलाके पर लाखों रुपए खर्च कर एक तालाब खोदा गया लेकिन वह तालाब बारिश के दिनों में भी सूखा नजर आता है ।
वहीं टाटा मारी के प्रवेश द्वार के समीप पुष्प वाटिका जिस पर लाखों लाख रुपए खर्च कर अनेकों प्रकार की फूल पौधे लगाए गए जो पानी के अभाव में आज सूखने की कगार पर है वही नन्हे मुन्ने बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूलों की स्थिति भी दयनीय है मेंटेनेंस के अभाव में कई झूले या तो टूट चुके हैं या टूटने की कगार पर पहुंच गए हैं ।
फॉरेस्ट विभाग केशकाल के द्वारा एक पर्यटन केंद्र टाटा मारी में लाखों रुपए खर्च कर एक हब्स गार्डन का भी निर्माण किया गया था जिस पर लाखों रुपए के पौधे अलग-अलग औषधियुक्त पौधे लगाए गए थे लेकिन अब यह हर्बल गार्डन अपनी अंतिम शासक गिन रहा है ।

केशकाल टाटा मारी में पानी की कमी के कारण हमेशा समस्याओं का सामना लोगों को करना पड़ता है ।पानी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए टाटा मारी मैदानी क्षेत्र पर कई बार बोरवेल के माध्यम से पानी निकालने का प्रयास किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली वहीं टाटा मारी के नीचे स्थित बोरवेल से टाटा मारी तक पानी चढ़ाने के लिए स्थाई स्टील की पाइपलाइन बिछाई गई जिससे कुछ क्षेत्रों को पानी तो मिल रहा है एवं जिससे रुकने वाले पर्यटकों के पीने एवं नहाने के पानी की व्यवस्था तो हो रही है लेकिन पेड़ पौधों के लिए यहां पानी पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। जिसके चलते लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर लगाए गए पौधे आज अपनी अंतिम सांसे गिन रहे हैं। विभाग की लापरवाही के चलते जनता के टैक्स के करोड़ों रुपए आज बर्बादी के कगार पर हैं। बिना किसी ठोस प्लानिंग के किए गए करोड़ों रुपए बर्बादी का कारण कौन क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी के ऊपर किसी प्रकार की कार्रवाई की गई है या आगे की जाएगी विभाग के ऊपर यह सवालिया निशान लग रहा है।


