
इमरान पारेख कि खबर
आदिवासियों का महापर्व नया बीजा (पूना पड़े) नवा खाई (पुनांग तिहार) साल की नया फसल धान (ओंजी) को खाने से पहले परिवार के पुरखा दुल्हल पेन में अर्पित कर परिवार के प्रत्येक सदस्य अर्पित करते है । यह त्योहार हमारे क्षेत्र में भी बड़े धूम धाम से मनाया जाता है पहले दिन नवा तो दूसरे दिन बासी तिहार मनाते है इसी कड़ी में ग्राम पारोंड ब्लाक बड़ेराजपुर के गांयता मरकाम परिवार में भी परंपरा अनुसार धूम धाम से मनाया गया ।
इस वर्ष भी हर वर्ष की भांति गांयता परिवार में दूल्हा पेन के पुजारी के द्वारा निश्चित स्थान में बच्चों के लिए बने खिलौना लड़के के लिए बैल, लड़कियों के लिए जता को भी साथ में रख कर सबसे पहले नया धान से बने चिवड़ा को कूड़ई पत्ता में दो भाग कर अलग अलग किया गया एक भाग पुरुषों के लिए और एक भाग महिलाओं के लिए अलग कर रखा गया उसके बाद दूल्हा पेन के पुजारी विधिवत सेवा अर्जी करते हुए कूड़ई पत्ता पहले रखता हैं उसके बाद पूना पड़े(नया धान के चिवड़ा) , रोटी, चढ़ाया तत्पश्चात परिवार पुरुष सदस्य बारी बारी से चढ़ाए तीसरे पारी में परिवार के महिला सदस्यों ने भी चढ़ाए ।
परिवार के बुजुर्गों के द्वारा महुआ डोंगा (कोया पुंगार के रस) पुरखों को अर्पित किया गया तब पूरे परिवार को अपने अपने भाग के नया चावल के चिवड़ा को वितरण किया गया । नया बीजा (पूना पड़े) को खाने के पश्चात हाथ धो कर बड़ों को छोटे लोगों पैरपढ़ कर बड़ों का आशीर्वाद लिए और सभी मिल कर साल भर की सुख दुःख की चर्चा किए । इस वर्ष हमारे परिवार में दो सदस्य नया रहे जिसमे एक नई बहू , एक पुत्र इस प्रकार मान्यता है की अगर गर्भ में भी रहने से उनके लिए हिस्सा होने वाली मां (याया) को दिया जाता है ।
हमारे गांव में नया खाई के दिन ग्राम पटेल परिवार से महिला , पुरुष, बच्चे सब मिल कर गांयता जोहारनी गांयता के घर आते हैं और दूसरे दिन बासी तिहार के दिन गांयता परिवार से महिला ,पुरुष , बच्चे सब मिल कर पटेल जोहारनी पटेल के घर जाते है। परंपरा अनुसार इस वर्ष भी जोहारनी में चिवड़ा, रोटी को पत्ते के दोना में रख कर और नारियल, कोया रस लेकर पटेल परिवार गांयता घर नया खाई के दिन आए और गांयता परिवार दुसरे बासी तिहार के दिन पटेल घर चले गए । साथ में जाते जाते झमा झम गोंडी रेला पाटा के साथ जा कर सम्मान पूर्वक जोहार भेंट किए ।


