छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों की पैथॉलजी लैब अब निजी कंपनी के हाथों में।सरकार के फैसले का कर्मचारी संघ एवं विपक्ष कर रहे विरोध।

महफूज़ अली/कोंडागांव/29अगस्त2026–
स्वास्थ्य विभाग और मंत्रियों का कहना है कि इस फैसले से काम की गुणवत्ता बढ़ेगी।

सरकार का दावा है कि इस नए सिस्टम से दूरदराज के गांवों और आदिवासी इलाकों के लोगों को भी शहरों जैसी बेहतरीन लैब सुविधाएं मिल सकेंगी।


छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में आधुनिक जांच सुविधाएं देने के लिए केंद्रीय कंपनी एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड (HLL Lifecare Limited) के साथ एक समझौता (MoU) किया है। इसके तहत राज्य में ‘अटल आरोग्य लैब’ (Atal Arogya Lab) नेटवर्क शुरू किया गया है, जिसके जरिए मरीजों को मुफ्त और डिजिटल जांच सेवाएं दी जा रही हैं।हालांकि, इस फैसले को लेकर राज्य में काफी विवाद और विरोध भी हो रहा है।

यह योजना राज्य के 1,051 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में लागू की जा रही है। इसमें जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) शामिल हैं।जिला अस्पतालों में अब 134 प्रकार की मुफ्त जांच मिलेंगी। पहले से ज्यादा बीमारियों की पहचान अब आसानी से हो सकेगी।हब एंड स्पोक मॉडल: जांच के लिए एक राज्य स्तरीय मुख्य लैब (रिफरेंस लैब) और चार संभागीय लैब बनाई जा रही हैं। छोटे अस्पतालों से सैंपल इकट्ठा करके बड़ी लैब्स में भेजे जाएंगे।

मरीजों की जांच रिपोर्ट सीधे उनके मोबाइल पर SMS या WhatsApp के जरिए भेजी जाएंगी। नई व्यवस्था में बारकोड सिस्टम और ऑटोमेटिक मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है। इससे रिपोर्ट में गड़बड़ी की आशंका कम हो जाती है।
सरकारी फैसले का स्वास्थ्य कर्मचारी संघ और विपक्ष द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है:बिना टेंडर के ठेका: आरोप है कि एचएलएल कंपनी को बिना किसी खुली निविदा (टेंडर) के, सीधे नॉमिनेशन (सीधे चुनाव) के आधार पर 5 साल के लिए यह बड़ा काम सौंप दिया गया।सरकारी अस्पतालों में पहले से ही करीब 600 से 1,000 करोड़ रुपये की आधुनिक मशीनें लगी हुई थीं। नई मशीनें आने से पुरानी मशीनों को पैक करके कबाड़ की तरह डंप किए जाने की तस्वीरें सामने आई हैं।मुफ्त संसाधन: सरकार कंपनी को अस्पतालों में जगह, बिजली, पुराने लैब तकनीशियन और स्टाफ मुफ्त में दे रही है। इसके बावजूद जांच का खर्च भी सरकार कंपनी को देगी।
विरोध करने वालों का कहना है कि जिस कंपनी को यह ठेका मिला है, उसके खिलाफ भोपाल में सीबीआई (CBI) की जांच और एफआईआर दर्ज है। नियमों के मुताबिक ऐसी कंपनी को काम नहीं दिया जाना चाहिए था।निजीकरण का विरोध: स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का कहना है कि सरकारी लैब को इस तरह बाहरी हाथों में सौंपना सेवा के क्षेत्र को व्यापार बनाना है।
सरकार और विभाग का पक्षविवादों के बीच स्वास्थ्य विभाग और मंत्रियों का कहना है कि इस फैसले से काम की गुणवत्ता बढ़ेगी। पुरानी मशीनों को पूरी तरह फेंका नहीं गया है, बल्कि उन्हें बैकअप के रूप में रखा गया है। जब तक पुरानी मशीनों के केमिकल (रीजेंट) उपलब्ध हैं, उनका उपयोग किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस नए सिस्टम से दूरदराज के गांवों और आदिवासी इलाकों के लोगों को भी शहरों जैसी बेहतरीन लैब सुविधाएं मिल सकेंगी।

Leave a Comment

और पढ़ें