गांयता जोहारनी महापर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया

कोंडागांव -फरसगांव ST,SC,OBC, मूलनिवासी समाज समन्वय समिति जिला कोंडागांव (छ.ग.) के तत्वावधान में संयुक्त रूप से पंरपरागत गांयता,,जोहारनी महापर्व बड़ी धूमधाम से अस्पताल मैदान कुदरती नार, फरसगांव के डिही में संपन्न हुआ,,
ऐतिहासिक गांयता जोहारनी महापर्व प्राकृतिक रूप से कोंडागांव जिला के आलावा बस्तर संभाग के अंतर्गत अन्य जिलों के गांव नार संरचना एवं गांयता व्यवस्था के अनुसार गांयता एवं सामाजिक पदाधिकारीयों की उपस्थिति हुई,, सभी को प्राकृतिक रूप से पीला चांवल से टीका लगा कर सफेद पगड़ी पटका से पगड़ी बांध कर सम्मान किया गया,,
सबसे पहले प्राकृतिक रूप से गांव नार संरचना एवं गांयता व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एवं बारह मानेय बारह सगा भाईयों को साथ में लेकर समन्वय स्थापित करते हुए माटी गांयता, पुजारी के द्वारा प्राकृतिक रूप से सेवा अर्जी विनती पूजा पाठ किया,, तत्पश्चात सबसे पहले गांयताओं को एक कतार बिठा कर पीला चांवल से टीका लगा कर सफेद पगड़ी बांध कर सम्मान किया गया,, तत्पश्चात सभी समाज के पदाधिकारियों को विधि विधान से पीला चांवल से टीका लगा कर सफेद पगड़ी बांध कर सम्मान किया गया,,,मातृ शक्तियों को भी सम्मान किया गया,, ऐतिहासिक गांयता जोहारनी महापर्व में, सभी वर्गों के सामाजिक नृत्य का प्रदर्शन किया गया,, सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया,,
गांयता जोहारनी महापर्व में उपस्थित सभी सगाजनों को विधि विधान से पंरपरागत रूप से कोरिया पत्ता से चिंवड़ा वितरण किया गया

   इस मंच से  पूर्व कलेक्टर नीलकंठ टेकाम ने कहा
यही एक ऐसा  संगठन है जिसमें सभी जाति और धर्म के लोग एक साथ सभी पंचायत से एक जगह बैठकर ठाकुर जोहरनी मनाएंगे और बस्तर के भविष्य का निर्धारण करेंगे बस्तर के मौलिक अधिकारों का संरक्षण करेंगे यहा के लोगो को कभी एसटी के नाम पर कभी ओबीसी के नाम पर कभी एससी के नाम पर लड़ाया जाता है।
बस्तर में स्थानीय भारती रहना चाहिए जो इसको बरकरार रखेगा वह बस्तर में राज करेगा
हमारी जो संस्कृति है इस संस्कृति के सहारे हमारे जो रिश्ते नाते हैं हमारे जो नार  व्यवस्था है हमारा जो गांव व्यवस्था है हमारा जो ठाकुर व्यवस्था है हमारा जो रीति नीति और संस्कृति है उसकी रक्षा करनी है हम चाहे जो भी हैं कोई प्रशासनिक सेवा में हो कोई राजनीति में हो कोई कोई शासन प्रशासन में हो समाज सेवा में हो सबसे पहले भारत का मूल निवासी है छत्तीसगढ़ का मूल निवासी है बस्तर का मूल निवासी है यह उसके मन में आना चाहिए तब जाकर उसके गौरव को भावना बढ़ेगी

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