
*वाराणसी में मिला रश्मि विपिन अग्निहोत्री को काव्य वसुंधरा सम्मान*
इमरान पारेख कि खबर 

09 अक्टूबर को राष्ट्रीय साहित्यिक मंच साहित्य सागर का सातवाँ आयोजन काशी विश्वनाथ की भूमि बनारस में पराड़कर स्मृति भवन में सम्पन्न हुआ। देश-विदेश से आये अनेकों कलमकारों एवं उनके रिश्तेदारों ने इस भव्य आयोजन की गरिमा को बढ़ाया। माँ सरस्वती का पूजन, वन्दन व राष्ट्रगान से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। माँ सरस्वती का वन्दन आचार्य आशीष दुबे ने किया।
साहित्य सागर के इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) से आये समाजसेवी सुशील जी भगेलावाला रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य सागर के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ऋषि अग्रवाल ‘सागर’ ने की। कार्यक्रम में आशीर्वाद देने भदोही जिले से पधारे आचार्य विवेक दुबे महाराज जी, काशी पत्रकार संघ के महामंत्री, गीतकार व ग़ज़लकार डॉ. अत्री भारद्वाज, हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष व साहित्यकार प्रोफेसर श्रद्धानन्द विशिष्ठ अतिथि की भूमिका में रहे। सभी अतिथियों का स्वागत माला, शाल व स्मृति चिन्ह से किया गया।
आयोजन में कुल सोलह पुस्तकों का विमोचन हुआ, जिसमें आठ एकल व आठ साझा संग्रह थी। आयोजन में मंच संचालन श्वेता अग्रवाल ‘ग़ज़ल’, हृदेश वर्मा ‘महक’ व चंचल माहौर ने किया। आयोजन से जुड़े सभी साझा कलमकारों को काव्य वसुंधरा सम्मान से एवं एकल पुस्तक के कलमकारों को माँ शारदे सम्मान से सम्मानित किया गया। साहित्य सागर संस्था के सह-संचालकों को साहित्य सागर सारथी सम्मान से सम्मानित किया गया। कुल सात घंटे के कार्यक्रम में सभी कलमकारों व अतिथियों ने सहयोग व साथ देकर कार्यक्रम की गरिमा को बनाये रखा।रश्मि विपिन ने बताया कि “कोसल पुष्प “साझा संग्रह में मेरे साथ साथ छत्तीसगढ़ से –अनुरमा शुक्ला जी, अमिताभ दीवान जी ,अविनाश तिवारी जी ,आलोक शुक्ला जी ,गजेन्द्र द्विवेदी ‘गिरीश’ जी दिवाकर चन्द्र त्रिपाठी ‘अम्बुज’ जी , नलिनी बाजपेयी , नन्हीं कलमकार पृथा शर्मा , प्रवीण चतुर्वेदी ‘पुष्प’, डॉ. मंजुश्री वेदुला , राकेश मिश्रा जी, शत्रुंजय तिवारी जी ,डॉ. संध्या शर्मा ,सावित्री मिश्रा जी जैसे बड़ी हस्तियों की रचनाएं शामिल है । यह मेरे लिए गौरव की बात है । ज्ञात हो कि रश्मि विपिन चौथी बार इस राष्ट्रीय आयोजन में समिलित हुई, इससे पहले राजस्थान, वृंदावन उज्जैन में भी उन्होंने आयोजन का हिस्सा बन छत्तीसगढ़ सहित बस्तर का नाम रौशन किया। उनके साथ इस आयोजन में उनके परिवार से पति विपिन अग्निहोत्री, सुनीता अग्निहोत्री, अंकित अग्निहोत्री और सुरेन्द्र पाण्डेय साथ पहुंचे। रश्मि जी का दो एकल संग्रह “काव्य-रश्मि ” कभी हँसता कभी सुलगता बस्तर और 26 से अधिक साझा संग्रह अब तक प्रकाशित हो चुके हैं , इस गौरवशाली उपलब्धि के लिए उन्हें उनके विद्यालय, शिप्रा विद्यालय परिवार केशकाल, लोकेश गायकवाड़, जी एस मिश्रा सर घनश्याम नाग सर, शिप्रा त्रिपाठी जी डा .त्रिपाठी जी, अग्निहोत्री परिवार बाजपेयी परिवार सहित सभी शुभचिन्तकों ने बधाई प्रेषित की ।

