*बंजारा सहायता समूह छत्तीसगढ़ का द्वितीय वार्षिक अधिवेशन टाटामारी में संम्पन्न* –

बंजारा सहायता समूह छत्तीसगढ़ का द्वितीय वार्षिक अधिवेशन टाटामारी में संम्पन्न

केशकाल :- बंजारा सहायता समूह छत्तीसगढ़ का वार्षिक अधिवेशन 21 अगस्त रविवार को केशकाल के प्राकृतिक सौंदर्यता से परिपूर्ण टाटामारी में सम्पन्न हुआ, जिसमे बंजारा सहायता समूह छत्तीसगढ़ के सदस्य शामिल हुए । कार्यक्रम के शुरुवात में बुजुर्ग दिवस के अवसर पर बुजुर्गो का साल श्रीफल से सम्मान किया गया व बंजारा सहायता समूह के द्वारा गत दिनों ऑनलाइन निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जिसमे प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर आने वाले विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया । ततपश्चात वार्षिक अधिवेशन की शुरुआत सबसे पहले बंजारा समाज के धर्म गुरु संत सेवालाल महाराज जी के छाया चित्र के समक्ष दिप प्रज्वलित कर पूजा अर्चना किया गया । बंजारा सहायता समूह छत्तीसगढ़ के वार्षिक अधिवेशन में समूह के अध्यक्ष दीपक नायक के द्वारा समूह बनने से लेकर 25 महीनों में किए गए कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया गया, वही समूह के लक्ष्य के बारे में भी बताया गया । द्वितीय वार्षिक अधिवेशन में मुख्य अतिथि सुखिया राम चौहान, विशिष्ट अतिथि में लोकनाथ राठौर, बलराम पमहार, सत्यनारायण नायक, नरेंद्र भारद्वाज, श्रीमती ललिता पवार, श्रीमती संतोष अजमेरा व अन्य समाज के लोगों सहित बंजारा सहायता समूह के सदस्य दीपक नायक, अनुराग नायक, अखिलेश राठौर, पुरषोतम नायक, मोती राठौर, कन्हाई बंजारा, विष्णु नायक, मनोज मुछवड़, आलेख नायक, रामकुमार भारद्वाज, संतोष नायक, हेमराज भारद्वाज, किशोर पमहार, विजय बंजारा, घनश्याम पमहार, मोती चौहान, श्रीमती मनीषा चौहान, श्रीमती शकुन्तला नायक, श्रीमती राधा पमहार, केशव नायक, कमलेश भारद्वाज, विनोद राठौर व अन्य सदस्य उपस्थित रहे ।

–बंजारा सहायता समूह छत्तीसगढ़ के है पांच उद्देश्य–

समूह ने पांच उद्देश्य को लेकर कार्य कर रही है । समाज के कमजोर व असहाय व्यक्तियों को सहयोग प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिये प्रेरित करना । लोगों को अपने समाज के लिए रचनात्मक कार्यों के लिए प्रोत्साहित करना । विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सहयोग के द्वारा जनहित में समस्त कार्य कर समाज के विकास कार्य मे सहयोग करना । समाजिक धरोहर ( समाज के रीति – रिवाज़ , बोली – चोली , सभ्यता व संस्कृति ) के प्रति युवाओं को प्रेरित करना । क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना व संरक्षण संवर्धन करना । नि : शक्त , दिव्यांग , कमजोर गरीब , वृद्धजनों पर उनकी सामाजिक आर्थिक मनोवैज्ञानिक एवं देखभाल सम्बंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुये विभिन्न प्रकार से मदद के रूप में योजना बनाकर उनका क्रियान्वयन करना ।

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