छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध टाटा मारी इको पर्यटन केंद्र में कीमती वृक्षों की हो रही अवैध कटाई।वन विभाग गहरी नींद में ।

केशकाल/महफूज़ अली/24अप्रैल2026–बस्तर का प्रवेश द्वार केशकाल में स्थित छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल टाटा मारी पर्यटन केंद्र में इन दिनों धड़ल्ले से कीमती वृक्षों की अवैध कटाई की जा रही है। टाटामारी ईको पर्यटन केंद्र में चारों ओर से करोड़ों की लागत से पत्थर की बाउंड्री वॉल बनाई गई है एवं मेन गेट पर वन सुरक्षा समिति के लड़के तैनात रहते हैं। उसके बावजूद ईको पर्यटन केंद्र के अंदर से अवैध वृक्षों की कटाई लगातार जारी है वन विभाग को सूचना देने के बाद भी अवैध कटाई का सिलसिला थम नहीं रहा है ।वन विभाग के ऊपर गंभीर प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं ।ईको पर्यटन केंद्र की चार दिवारी के अंदर जब वृक्ष सुरक्षित नहीं है तो बाकी जगहों पर कीमती वृक्षों का क्या हाल होगा।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रसिद्ध पर्यटक स्थल टाटा मारी इको पर्यटन केंद्र में रात गुजारी थी ।पूर्व मुख्यमंत्री के आगमन के पूर्व टाटा मारी पर्यटन केंद्र में मुख्यमंत्री को दिखाने सैकड़ो की संख्या में आर्टिफिशियल प्लास्टिक के पौधे लगाए गए थे लेकिन वर्तमान में टाटा मारी इको पर्यटन केंद्र में मौजूद कीमती वृक्षों को काटने से नहीं रोका जा रहा है इस पर भी वन विभाग पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है।

केशकाल में स्थित टाटामारी ईको पर्यटन केंद्र में प्रतिदिन देश एवं प्रदेश के सैकड़ो पर्यटक प्रकृति की छटा निहारने आते हैं एवं टाटा मारी इको पर्यटन केंद्र में स्थित वुडन कॉटेज में रात रुक कर प्रकृति का अनुभव लेते हैं, लेकिन पेड़ों की अवैध कटाई से अब यह पर्यटन केंद्र में गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है।

केशकाल स्थित ईको पर्यटन केंद्र टाटा मारी में मोटरसाइकिल एवं कर से आने वाले पर्यटकों से फीस वसूली जाती है मोटरसाइकिल चालकों से ₹20 वही कर वाहन चालकों से ₹50 का शुल्क लिया जाता है ताकि पर्यटन केंद्र की साफ सफाई एवं सौंदर्यता को बरकरार रखा जा सके। प्रदेश भर  के अधिकारी माननीय मंत्री एवं माननीय उच्च न्यायालय के जज भी रात गुजारने टाटा मारी इको पर्यटन केंद्र पर अक्सर आते रहते हैं।

टाटा मारी इको पर्यटन केंद्र में छत्तीसगढ़ शासन की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर नए-नए केंद्र बनाए जा रहे हैं जिससे कि पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके लेकिन ईको पर्यटन केंद्र में वृक्षों की कटाई ही नहीं रुक पा रही है तो फिर करोड़ों रुपए खर्च करने का क्या फायदा।

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